लेखनी कहानी -13-May-2022#नान स्टाप चैलेंज# तलाक़
सुमी और सोहन को आज कोर्ट मे पेश होना था ।छह महीने से तलाक की अर्जी दे रखी थी आज आखिरी सुनवाई थी कोर्ट मे। उसके बाद आज जज साहब फैसला सुना कर दोनों की दो राहें करने वाले थे।सुमी के साथ उसके भाई भाभी कार मे बैठे थे और गाड़ी कोर्ट की ओर जा रही थी।
उधर सोहन के साथ भी उसके मम्मी पापा बैठे थे गाड़ी मे वे भी कोर्ट की ओर चल पड़े थे।
सुमी और सोहन की लव मैरिज थी नौ महीने ही हुए थे शादी को ।शादी के बाद कुछ दिन तो नये अहसास नये जज़्बात थे दोनों प्यार से रहे । पर थोड़े दिनों बाद दोनों की कमियां एक दूसरे के सामने आने लगी । सोहन पहले सुमी की सोचकर शराब नही पीता था पर अब दो चार दिन मे पीने लगा था ।सुमी को याद था उसने शादी के बंधन मे बंधने से पहले यही पूछा था ,"आप शराब तो नही पीते ?"
सोहन ने ना कर दी थी ।अब जब सुमी उसे शराब के नशे मे देखती तो उसे खीज लगती। इसी तरह सुमी घर के काम मे माहिर नही थी कुछ ना कुछ गलती हो ही जाती थी उससे जिससे सोहन को खीज मचती थी।धीरे धीरे झगड़े बढ़ने लगे।एक दिन सोहन शराब के नशे मे आया तो सब्जी मे नमक तेज होने के कारण सुमी पर बरस पड़ा "तुम्हें कुछ नही आता ।पता नही सारा दिन कया आवारागर्दी करती रहती हो यूं नही कि कुछ बनाना सीख लूं।"
सुमी भी कहां पीछे हटनू वाली थी उसने भी कह दिया ,"तुम दहेज के लोभी हो मेरे पिताजी के पैसों के आगे अपनी सारी कमियां छुपा गये।" बात इतनी बढ़ गयी कि सुमी अटैची उठा कर मायके आ गयी और भाई भाभी ने तलाक के कागज भेज दिए सोहन के पास।उधर सोहन ने भी गुस्से मे आकर दस्तखत करके पेपर कोर्ट मे जमा करा दिए ।आज फैसले का दिन था।जैसे जैसे कोर्ट नजदीक आती जा रही थी दोनों के दिल की धडकन तेज हो रही थी।सुमी भी सोच रही थी कि मैने ऐसे ही सोहन पर दहेज के लोभी होने का लांछन लगाया अगर उसे पैसों का लोभ होता तो वो कागजों पर दस्तखत नही करता ।वैसे कितना प्यार करता था सोहन उससे ।उसी ने तो डूबने से बचाया था उसे अपनी जान पर खेलकर तभी वह दीवानी हो गयी थी सोहन की ।मै कैसे रहूंगी सोहन के बगैर । यही सोचते सोचते सुमी की आंखों मे पानी आ गया।
उधर सोहन भी सोच रहा था कितना प्यार करती है वो मुझ से मै रात को कितना भी लेट हो जाता था मेरे बगैर खाना नही खाती थी वह ।बीमार होने पर सारी सारी रात सेवा मे लगी रहती थी अब इस तरीक़े से कौन ख्याल रखेगा उसका ।ये सोचकर सोहन की आंखों मे भी पानी आ गया । दोनों जब अपनी अपनी गाड़ी से उतरे तो दोनों के चेहरे आंसुओं से भीगे हुए थे।
दोनों एक दूसरे को लगातार देखे जा रहे थे।जिसे सुमी के भाई ने और सोहन के पिता ने भांप लिया और वे दोनों थोड़ी देर के लिए अपनी अपनी पत्नी को लेकर एक तरफ हो गये ।सुमी और सोहन एक बेंच पर बैठे थे । दोनों काफी समय तक चुप रहे सहसा दोनों इकट्ठे ही बोल पड़े "मुझे माफ कर दो।"बस सब्र का बांध टूट गया ।छह महीने अलग रह कर जो उन्होंने अपना वैचारिक मंथन किया था उसका परिणाम सामने आ गया । दोनों ने तलाक के कागजों को फ़ाड़ कर फिर से जिंदगी की एक नयी शुरुआत का मन बना लिया था ।दो पंछी लौट चले थे अपने पुराने घरोंदे को आशियाना बनाने के लिए।
अदिति झा
17-Feb-2023 10:35 AM
Nice 👍🏼
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Varsha_Upadhyay
16-Feb-2023 08:41 PM
Nice
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सीताराम साहू 'निर्मल'
16-Feb-2023 07:03 PM
शानदार
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